vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 86: निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन
»
श्लोक 23
श्लोक
2.86.23
परिदेवयमानस्य तस्यैवं हि महात्मन:।
तिष्ठतो राजपुत्रस्य शर्वरी सात्यवर्तत॥ २३॥
अनुवाद
इस प्रकार विलाप करते हुए महाहृदयी राजकुमार लक्ष्मण ने सारी रात जागकर बिताई॥ 23॥
'Lamenting in this manner, the great-hearted Prince Lakshmana spent the entire night awake.॥ 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×