श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 86: निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.86.14 
विनद्य सुमहानादं श्रमेणोपरता: स्त्रिय:।
निर्घोषो विरतो नूनमद्य राजनिवेशने॥ १४॥
 
 
अनुवाद
'निश्चय ही अब तक महल की स्त्रियाँ अत्यधिक परिश्रम के कारण जोर-जोर से विलाप करने के बाद चुप हो गई होंगी और राजमहल का कोलाहल अब तक शांत हो गया होगा॥ 14॥
 
'Surely by now the women of the palace would have fallen silent due to the excessive exertion after wailing loudly and the uproar in the royal palace would have subsided by now.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)