श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 86: निषादराज गुह के द्वारा लक्ष्मण के सद्भाव और विलाप का वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.86.1 
आचचक्षेऽथ सद्भावं लक्ष्मणस्य महात्मन:।
भरतायाप्रमेयाय गुहो गहनगोचर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वनपाल गुह ने महाबली भरत के प्रति महात्मा लक्ष्मण की सद्भावना का इस प्रकार वर्णन किया -॥1॥
 
The forest herder Guha described the goodwill of Mahatma Lakshmana towards the immeasurably powerful Bharata in this way -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)