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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 85: गुह और भरत की बातचीत तथा भरत का शोक  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.85.7 
कच्चिन्न दुष्टो व्रजसि रामस्याक्लिष्टकर्मण:।
इयं ते महती सेना शङ्कां जनयतीव मे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
"परन्तु एक बात बताओ, क्या तुम अकारण ही पराक्रमी श्री रामजी के प्रति द्वेष रखते हो? तुम्हारी यह विशाल सेना मेरे मन में कुछ संदेह उत्पन्न कर रही है।" ॥7॥
 
"But tell me one thing, are you carrying some ill-will towards the mighty Sri Rama without any reason? This huge army of yours is giving rise to some doubt in my mind." ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)