Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.85.16: धर्म पर दृष्टि रखने वाले महात्मा भरत शोक करने योग्य तो नहीं थे, परन्तु भगवान राम के लिए चिन्ता के कारण उनके हृदय में ऐसा शोक हुआ जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता॥16॥ | ramayan सर्ग 2.85: गुह और भरत की बातचीत तथा भरत का शोक । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म पर दृष्टि रखने वाले महात्मा भरत शोक करने योग्य तो नहीं थे, परन्तु भगवान राम के लिए चिन्ता के कारण उनके हृदय में ऐसा शोक हुआ जिसका वर्णन नहीं किया जा सकता॥16॥
Bharata, the great soul who had an eye on Dharma, was not worthy of mourning. However, due to concern for Lord Rama, he felt such grief in his heart that it cannot be described. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥