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ramayan 2.84.9: फिर उन्होंने कहा, 'यदि भगवान राम के प्रति भरत की भावनाएँ संतोषजनक हैं, तभी उनकी सेना आज सुरक्षित रूप से गंगा पार कर सकेगी।'   |   ramayan सर्ग 2.84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.84.9 
यदि तुष्टस्तु भरतो रामस्येह भविष्यति।
इयं स्वस्तिमती सेना गङ्गामद्य तरिष्यति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने कहा, 'यदि भगवान राम के प्रति भरत की भावनाएँ संतोषजनक हैं, तभी उनकी सेना आज सुरक्षित रूप से गंगा पार कर सकेगी।'
 
He then said, 'If Bharat's feelings for Lord Rama are satisfactory, then only his army will be able to cross the Ganga safely today.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)