श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.84.8 
नावां शतानां पञ्चानां कैवर्तानां शतं शतम्।
संनद्धानां तथा यूनां तिष्ठन्त्वत्यभ्यचोदयत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘हमारे पास पाँच सौ नावें हैं, उनमें से प्रत्येक पर युद्ध-सामग्री से सुसज्जित सौ युवा नाविक बैठाए जाएँ।’ इस प्रकार गुहा ने सबको आदेश दिया।
 
'We have five hundred boats, on each of them a hundred young sailors should be seated, equipped with war equipment.' Thus Guha ordered them all.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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