Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.84.3: 'निश्चय ही दुष्टबुद्धि वाले भरत स्वयं इसमें उपस्थित हैं; उनके रथ पर कोविदर का प्रतीक वाला यह विशाल ध्वज लहरा रहा है।   |   ramayan सर्ग 2.84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.84.3 
यदा नु खलु दुर्बुद्धिर्भरत: स्वयमागत:।
स एष हि महाकाय: कोविदारध्वजो रथे॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'निश्चय ही दुष्टबुद्धि वाले भरत स्वयं इसमें उपस्थित हैं; उनके रथ पर कोविदर का प्रतीक वाला यह विशाल ध्वज लहरा रहा है।
 
'Surely the evil-minded Bharata himself is present in this; this huge flag bearing the symbol of Kovidara is fluttering on his chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)