Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.84.16: यह वनभूमि आपके घर में लगे हुए बगीचे के समान है। आपने हमें अपने आगमन की सूचना न देकर धोखा दिया - हम आपके स्वागत की कोई तैयारी नहीं कर सके। हमारे पास जो कुछ है, वह आपको अर्पित करते हैं। निषादों का यह घर आपका है, आप यहाँ सुखपूर्वक रहें। ॥1 6॥ | ramayan सर्ग 2.84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निष्कुटश्चैव देशोऽयं वञ्चिताश्चापि ते वयम्।
निवेदयाम ते सर्वं स्वके दाशगृहे वस॥ १६॥
अनुवाद
यह वनभूमि आपके घर में लगे हुए बगीचे के समान है। आपने हमें अपने आगमन की सूचना न देकर धोखा दिया - हम आपके स्वागत की कोई तैयारी नहीं कर सके। हमारे पास जो कुछ है, वह आपको अर्पित करते हैं। निषादों का यह घर आपका है, आप यहाँ सुखपूर्वक रहें। ॥1 6॥
‘This forest-land is like a garden planted in your home. You deceived us by not informing us of your arrival – we could not make any preparations to welcome you. Whatever we have, we offer it to you. This home of the Nishadas is yours, you may live here happily. ॥1 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥