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ramayan 2.84.12-13: ‘ककुत्स्थकुलभूषण! यह वृद्ध निषादराज गुह अपने सहस्रों भाइयों के साथ यहाँ रहते हैं। ये आपके बड़े भाई श्री राम के मित्र हैं। इन्हें दण्डकारण्य के मार्ग का विशेष ज्ञान है। इन्हें अवश्य ही पता होगा कि दोनों भाई श्री राम और लक्ष्मण कहाँ हैं। अतः निषादराज गुह को यहाँ आकर आपसे मिलने का अवसर दीजिए।’॥12-13॥   |   ramayan सर्ग 2.84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  2.84.12-13 
एष ज्ञातिसहस्रेण स्थपति: परिवारित:।
कुशलो दण्डकारण्ये वृद्धो भ्रातुश्च ते सखा॥ १२॥
तस्मात् पश्यतु काकुत्स्थं त्वां निषादाधिपो गुह:।
असंशयं विजानीते यत्र तौ रामलक्ष्मणौ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘ककुत्स्थकुलभूषण! यह वृद्ध निषादराज गुह अपने सहस्रों भाइयों के साथ यहाँ रहते हैं। ये आपके बड़े भाई श्री राम के मित्र हैं। इन्हें दण्डकारण्य के मार्ग का विशेष ज्ञान है। इन्हें अवश्य ही पता होगा कि दोनों भाई श्री राम और लक्ष्मण कहाँ हैं। अतः निषादराज गुह को यहाँ आकर आपसे मिलने का अवसर दीजिए।’॥12-13॥
 
‘Kakutsthakulbhushan! This old Nishadraj Guha lives here with his thousands of brothers. He is a friend of your elder brother Shri Ram. He has special knowledge of the route to Dandakaranya. He will surely know where both the brothers Shri Ram and Lakshman are. So give an opportunity to Nishadraj Guha to come here and meet you.’॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)