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ramayan 2.84.10: ऐसा कहकर निषादराज गुह मत्स्यादि (मिश्री), फलों का गूदा और मधु आदि उपहार लेकर भरत के पास गए॥10॥   |   ramayan सर्ग 2.84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.84.10 
इत्युक्त्वोपायनं गृह्य मत्स्यमांसमधूनि च।
अभिचक्राम भरतं निषादाधिपतिर्गुह:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर निषादराज गुह मत्स्यादि (मिश्री), फलों का गूदा और मधु आदि उपहार लेकर भरत के पास गए॥10॥
 
Saying this, King of the Nishadas Guha went to Bharata taking gifts of Matsyandi (sugar candy), fruit pulp and honey etc.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)