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ramayan 2.84.1: उधर निषादराज गुह ने गंगा नदी के तट पर खड़ी हुई भरत की सेना को देखकर सब ओर बैठे हुए अपने बन्धुओं और सम्बन्धियों से कहा-॥1॥   |   ramayan सर्ग 2.84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 84: निषादराज गुह का अपने बन्धुओं भेंट की सामग्री ले भरत के पास जाना और उनसे आतिथ्य स्वीकार करने के लिये अनुरोध करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.84.1 
ततो निविष्टां ध्वजिनीं गङ्गामन्वाश्रितां नदीम्।
निषादराजो दृष्ट्वैव ज्ञातीन् स परितोऽब्रवीत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
उधर निषादराज गुह ने गंगा नदी के तट पर खड़ी हुई भरत की सेना को देखकर सब ओर बैठे हुए अपने बन्धुओं और सम्बन्धियों से कहा-॥1॥
 
On the other hand, King of Nishads Guha, seeing Bharat's army stationed on the bank of river Ganga, said to his brothers and relatives sitting on all sides -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)