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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.83.3 
नवनागसहस्राणि कल्पितानि यथाविधि।
अन्वयुर्भरतं यान्तमिक्ष्वाकुकुलनन्दनम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यात्रा करते समय इक्ष्वाकु पुत्र भरत के पीछे नौ हजार हाथी, विधिपूर्वक सुसज्जित होकर चल रहे थे।
 
While travelling, nine thousand elephants, decorated as per rituals, were following Bharat, the son of Ikshvaku clan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)