Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.83.10: ऐसी बातें कहते हुए और एक दूसरे को गले लगाते हुए, बड़े आनन्द से भरे हुए, अयोध्यावासी उस समय यात्रा कर रहे थे।   |   ramayan सर्ग 2.83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 83: भरत की वनयात्रा और शृङ्गवेरपुर में रात्रिवास  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.83.10 
इत्येवं कथयन्तस्ते सम्प्रहृष्टा: कथा: शुभा:।
परिष्वजानाश्चान्योन्यं ययुर्नागरिकास्तदा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऐसी बातें कहते हुए और एक दूसरे को गले लगाते हुए, बड़े आनन्द से भरे हुए, अयोध्यावासी उस समय यात्रा कर रहे थे।
 
Saying such things and embracing one another, filled with great joy, the citizens of Ayodhya were travelling at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)