vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना
»
श्लोक 28
श्लोक
2.82.28
भरतस्य तु तस्याज्ञां परिगृह्य प्रहर्षित:।
रथं गृहीत्वोपययौ युक्तं परमवाजिभि:॥ २८॥
अनुवाद
भरत की आज्ञा स्वीकार करके सुमन्तर बड़े हर्ष के साथ गए और उत्तम घोड़ों से जुते हुए रथ के साथ लौटे।
Accepting Bharata's command, Sumantara went with great joy and returned with a chariot drawn by excellent horses.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×