श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.82.22 
तूर्णमुत्थाय गच्छ त्वं सुमन्त्र मम शासनात्।
यात्रामाज्ञापय क्षिप्रं बलं चैव समानय॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘सुमन्त्र जी! आप शीघ्र उठकर सबको वन में जाने का मेरा आदेश सुनाएँ और शीघ्र ही सेना भी बुला लें।’॥22॥
 
‘Sumantra ji! You get up quickly and go and inform everyone about my order to go to the forest and also call the army as soon as possible.’॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)