यदि त्वार्यं न शक्ष्यामि विनिवर्तयितुं वनात्।
वने तत्रैव वत्स्यामि यथार्यो लक्ष्मणस्तथा॥ १८॥
अनुवाद
भरत ने फिर कहा- 'यदि मैं आर्य श्री राम को वन से लौटाने में समर्थ न होऊँ, तो मैं स्वयं मनुष्यों में श्रेष्ठ लक्ष्मण के समान वहाँ निवास करूँगा॥18॥
Bharat again said - 'If I am not able to return Arya Shri Ram from the forest, then I myself will reside there like Lakshman, the best among humans. 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥