श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 82: वसिष्ठजी का भरत को राज्य पर अभिषिक्त होने के लिये आदेश देना,भरत का उसे अनुचित बताकर श्रीराम को लाने के लिये वन में चलने की तैयारी का आदेश देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.82.17 
तद्वाक्यं धर्मसंयुक्तं श्रुत्वा सर्वे सभासद:।
हर्षान्मुमुचुरश्रूणि रामे निहितचेतस:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भरत के धर्मयुक्त वचन सुनकर सभा के सभी सदस्य श्री रामजी का ध्यान करके हर्ष के आँसू बहाने लगे॥17॥
 
On hearing Bharat's righteous words, all the members of the assembly concentrated on Sri Rama and started shedding tears of joy. ॥17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)