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ramayan 2.81.8: उस समय भरत को इस प्रकार अचेत अवस्था में विलाप करते देख महल की सभी स्त्रियाँ दयनीय होकर रोने लगीं।   |   ramayan सर्ग 2.81: प्रातःकाल के मङ्गलवाद्य-घोष को सुनकर भरत का दुःखी होना और उसे बंद कराकर विलाप करना, वसिष्ठजी का सभा में आकर मन्त्री आदि को बुलाने के लिये दूत भेजना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 81: प्रातःकाल के मङ्गलवाद्य-घोष को सुनकर भरत का दुःखी होना और उसे बंद कराकर विलाप करना, वसिष्ठजी का सभा में आकर मन्त्री आदि को बुलाने के लिये दूत भेजना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.81.8 
इत्येवं भरतं वीक्ष्य विलपन्तमचेतनम्।
कृपणा रुरुदु: सर्वा: सुस्वरं योषितस्तदा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उस समय भरत को इस प्रकार अचेत अवस्था में विलाप करते देख महल की सभी स्त्रियाँ दयनीय होकर रोने लगीं।
 
At that time, seeing Bharata lamenting in this unconscious state, all the women in the palace began to cry in a pitiable mood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)