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स तूर्यघोष: सुमहान् दिवमापूरयन्निव।
भरतं शोकसंतप्तं भूय: शोकैररन्धयत्॥ ३॥
अनुवाद
वाद्यों की वह महान् गर्जना मानो सम्पूर्ण आकाश में व्याप्त हो गई और शोकाकुल भरत को पुनः शोक की ज्वाला से जलाने लगी।
That great tumultuous sound of the musical instruments resounded, as if permeating the entire sky, and began once again burning the grief-stricken Bharata with the flames of grief.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥