Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.8.26: "इसीलिए मैं आपके हित में कुछ सुझाव देने आया हूँ; परन्तु आप मेरा आशय नहीं समझते; इसके विपरीत, अपनी सहधर्मिणी के उत्थान के विषय में सुनकर आप मुझे पुरस्कृत करने आये हैं।" | ramayan सर्ग 2.8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
साहं त्वदर्थे सम्प्राप्ता त्वं तु मां नावबुद्धॺसे।
सपत्निवृद्धौ या मे त्वं प्रदेयं दातुमर्हसि॥ २६॥
अनुवाद
"इसीलिए मैं आपके हित में कुछ सुझाव देने आया हूँ; परन्तु आप मेरा आशय नहीं समझते; इसके विपरीत, अपनी सहधर्मिणी के उत्थान के विषय में सुनकर आप मुझे पुरस्कृत करने आये हैं।"
"That is why I have come here to suggest something that is in your best interest; but you do not understand my intention; on the contrary, on hearing of the rise of your co-wife, you have come to reward me. 26.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥