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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना
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श्लोक 25
श्लोक
2.8.25
असावत्यन्तनिर्भग्नस्तव पुत्रो भविष्यति।
अनाथवत् सुखेभ्यश्च राजवंशाच्च वत्सले॥ २५॥
अनुवाद
हे प्रिय पुत्र! तुम्हारा पुत्र न केवल राज्य-अधिकार से वंचित हो जाएगा, अपितु अनाथ के समान समस्त सुखों से भी वंचित हो जाएगा॥ 25॥
'O dear son! Your son will not only be deprived of the right to rule the kingdom, he will also be deprived of all comforts like an orphan.॥ 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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