श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.8.20 
कैकेय्या वचनं श्रुत्वा मन्थरा भृशदु:खिता।
दीर्घमुष्णं विनि:श्वस्य कैकेयीमिदमब्रवीत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
कैकेयी की यह बात सुनकर मंथरा को बड़ा दुःख हुआ। उसने एक लंबी और गर्म साँस लेकर कैकेयी से कहा -॥20॥
 
Manthara felt very sad on hearing this from Kaikeyi. She took a long and hot breath and said to Kaikeyi -॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)