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ramayan 2.8.1: यह सुनकर मन्थरा ने कैकेयी की निन्दा की और उसके दिए हुए आभूषण फेंक दिए। क्रोध और दुःख से भरकर वह इस प्रकार बोली-॥1॥   |   ramayan सर्ग 2.8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 8: मन्थरा का पुनः राज्याभिषेक को कैकेयी के लिये अनिष्टकारी बताना, कुब्जा का पुनः श्रीराम राज्य को भरत के लिये भयजनक बताकर कैकेयी को भड़काना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.8.1 
मन्थरा त्वभ्यसूय्यैनामुत्सृज्याभरणं हि तत्।
उवाचेदं ततो वाक्यं कोपदु:खसमन्विता॥ १॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर मन्थरा ने कैकेयी की निन्दा की और उसके दिए हुए आभूषण फेंक दिए। क्रोध और दुःख से भरकर वह इस प्रकार बोली-॥1॥
 
On hearing this, Manthara slandered Kaikeyi and threw away the ornaments given by her. Filled with anger and sorrow, she spoke thus -॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)