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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 79: भरत का अभिषेक-सामग्री की परिक्रमा करके श्रीराम को ही राज्य का अधिकारी बताकर उन्हें लौटा लाने के लिये चलने के निमित्त व्यवस्था करने की सबको आज्ञा देना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  2.79.10-11 
आभिषेचनिकं चैव सर्वमेतदुपस्कृतम्।
पुरस्कृत्य गमिष्यामि रामहेतोर्वनं प्रति॥ १०॥
तत्रैव तं नरव्याघ्रमभिषिच्य पुरस्कृतम्।
आनयिष्यामि वै रामं हव्यवाहमिवाध्वरात्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'अभिषेक के लिए एकत्रित की गई इन समस्त सामग्रियों को लेकर मैं श्री रामजी से मिलने के लिए वन में जाऊँगा और वहाँ उन पुरुषोत्तम श्री रामजी का अभिषेक करके उन्हें यज्ञ से लाई गई अग्नि के समान आगे ले जाकर अयोध्या ले आऊँगा।॥ 10-11॥
 
'Carrying forward all these materials collected for the anointment, I shall go to the forest to meet Sri Rama and after anointing that best of men Sri Rama there, I shall carry him forward like the fire brought from a yajna and bring him to Ayodhya.॥ 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)