श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 78: शत्रुज का रोष, उनका कुब्जा को घसीटना और भरतजी के कहने से उसे मूर्च्छित अवस्था में छोड़ देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.78.7 
मेखलादामभिश्चित्रैरन्यैश्च वरभूषणै:।
बभासे बहुभिर्बद्धा रज्जुबद्धेव वानरी॥ ७॥
 
 
अनुवाद
विचित्र करधनी तथा अन्य अनेक सुन्दर आभूषणों से सुसज्जित वह अनेक रस्सियों से बंधी हुई बन्दरिया सी प्रतीत हो रही थी।
 
Adorned with strange chains of girdle and numerous other beautiful ornaments, she looked like a female monkey tied with many ropes. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)