Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.77.8: उनके पिता की चिता का स्थान राख से भरा हुआ था और तीव्र जलन के कारण कुछ लाल दिखाई दे रहा था। उनके पिता की जली हुई हड्डियाँ वहाँ बिखरी हुई थीं। उस स्थान को देखकर, जहाँ उनके पिता का शरीर देहांत हुआ था, भरत शोक में डूब गए और ज़ोर-ज़ोर से विलाप करने लगे। 8.   |   ramayan सर्ग 2.77: भरत का पिता के श्राद्ध में ब्राह्मणों को बहुत धन-रत्न आदि का दान, पिता की चिता भूमि पर जाकर भरत और शत्रुघ्न का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 77: भरत का पिता के श्राद्ध में ब्राह्मणों को बहुत धन-रत्न आदि का दान, पिता की चिता भूमि पर जाकर भरत और शत्रुघ्न का विलाप करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.77.8 
दृष्ट्वा भस्मारुणं तच्च दग्धास्थि स्थानमण्डलम्।
पितु: शरीरनिर्वाणं निष्टनन् विषसाद ह॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उनके पिता की चिता का स्थान राख से भरा हुआ था और तीव्र जलन के कारण कुछ लाल दिखाई दे रहा था। उनके पिता की जली हुई हड्डियाँ वहाँ बिखरी हुई थीं। उस स्थान को देखकर, जहाँ उनके पिता का शरीर देहांत हुआ था, भरत शोक में डूब गए और ज़ोर-ज़ोर से विलाप करने लगे। 8.
 
The place of his father's funeral pyre was filled with ashes and looked somewhat red due to the intense burning. His father's burnt bones were scattered there. Seeing the place where his father's body had passed away, Bharata was drowned in grief and started wailing a lot. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)