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ramayan 2.77.26: वे आँसू पोंछते हुए विनीत स्वर में बोल रहे थे। उनकी आँखें लाल हो गई थीं और मंत्रीगण दोनों राजकुमारों से शीघ्रतापूर्वक अनेक कार्य पूर्ण करने का आग्रह कर रहे थे॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 2.77: भरत का पिता के श्राद्ध में ब्राह्मणों को बहुत धन-रत्न आदि का दान, पिता की चिता भूमि पर जाकर भरत और शत्रुघ्न का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 77: भरत का पिता के श्राद्ध में ब्राह्मणों को बहुत धन-रत्न आदि का दान, पिता की चिता भूमि पर जाकर भरत और शत्रुघ्न का विलाप करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.77.26 
अश्रूणि परिमृद्नन्तौ रक्ताक्षौ दीनभाषिणौ।
अमात्यास्त्वरयन्ति स्म तनयौ चापरा: क्रिया:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वे आँसू पोंछते हुए विनीत स्वर में बोल रहे थे। उनकी आँखें लाल हो गई थीं और मंत्रीगण दोनों राजकुमारों से शीघ्रतापूर्वक अनेक कार्य पूर्ण करने का आग्रह कर रहे थे॥ 26॥
 
They were wiping their tears and speaking in a humble voice. Their eyes had turned red and the ministers were urging the two princes to complete various tasks quickly.॥ 26॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे सप्तसप्ततितम: सर्ग:॥ ७७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें सतहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७७॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)