Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 2.77.21: तत्पश्चात् दिव्य स्वभाव वाले और सर्वज्ञ वसिष्ठजी, जो श्री राम आदि के पिता के पुरोहित थे, भरत को उठाकर उनसे इस प्रकार बोले- 21॥   |   ramayan सर्ग 2.77: भरत का पिता के श्राद्ध में ब्राह्मणों को बहुत धन-रत्न आदि का दान, पिता की चिता भूमि पर जाकर भरत और शत्रुघ्न का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 77: भरत का पिता के श्राद्ध में ब्राह्मणों को बहुत धन-रत्न आदि का दान, पिता की चिता भूमि पर जाकर भरत और शत्रुघ्न का विलाप करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.77.21 
तत: प्रकृतिमान् वैद्य: पितुरेषां पुरोहित:।
वसिष्ठो भरतं वाक्यमुत्थाप्य तमुवाच ह॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् दिव्य स्वभाव वाले और सर्वज्ञ वसिष्ठजी, जो श्री राम आदि के पिता के पुरोहित थे, भरत को उठाकर उनसे इस प्रकार बोले- 21॥
 
Thereafter Vasishthaji, possessed of divine nature and omniscient, who was the priest of the father of Shri Ram etc., picked up Bharat and spoke to him thus - 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)