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ramayan 2.77.20: उस समय भरत और शत्रुघ्न दोनों भाई शोक से पीड़ित और थके हुए, टूटे सींग वाले दो बैलों की तरह भूमि पर लोट रहे थे।   |   ramayan सर्ग 2.77: भरत का पिता के श्राद्ध में ब्राह्मणों को बहुत धन-रत्न आदि का दान, पिता की चिता भूमि पर जाकर भरत और शत्रुघ्न का विलाप करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 77: भरत का पिता के श्राद्ध में ब्राह्मणों को बहुत धन-रत्न आदि का दान, पिता की चिता भूमि पर जाकर भरत और शत्रुघ्न का विलाप करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.77.20 
ततो विषण्णौ श्रान्तौ च शत्रुघ्नभरतावुभौ।
धरायां स्म व्यचेष्टेतां भग्नशृङ्गाविवर्षभौ॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस समय भरत और शत्रुघ्न दोनों भाई शोक से पीड़ित और थके हुए, टूटे सींग वाले दो बैलों की तरह भूमि पर लोट रहे थे।
 
At that time both the brothers Bharata and Shatrughna, grief-stricken and exhausted, were rolling on the ground like two bulls with broken horns.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)