Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.76.6: हे राजन! मैं परदेश में था और आपके पास पहुँच भी नहीं पाया था, फिर आपने धर्मात्मा श्री राम और पराक्रमी लक्ष्मण को वन में भेजकर इस प्रकार स्वर्ग जाने का निर्णय कैसे किया?॥6॥ | ramayan सर्ग 2.76: राजा दशरथ का अन्त्येष्टि संस्कार । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किं ते व्यवसितं राजन् प्रोषिते मय्यनागते।
विवास्य रामं धर्मज्ञं लक्ष्मणं च महाबलम्॥ ६॥
अनुवाद
हे राजन! मैं परदेश में था और आपके पास पहुँच भी नहीं पाया था, फिर आपने धर्मात्मा श्री राम और पराक्रमी लक्ष्मण को वन में भेजकर इस प्रकार स्वर्ग जाने का निर्णय कैसे किया?॥6॥
'O King! I was in a foreign land and had not even been able to reach you, how did you decide to go to heaven like this after sending the virtuous Shri Ram and the mighty Lakshman to the forest?॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥