श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.75.8 
स तु राजात्मजश्चापि शत्रुघ्नसहितस्तदा।
प्रतस्थे भरतो येन कौसल्याया निवेशनम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उसी समय राजकुमार भरत भी शत्रुघ्न के साथ उसी मार्ग से आ रहे थे, जिस मार्ग से कौशल्या के महल में आने-जाने के लिए उपयोग किया जाता था।
 
At the same time Prince Bharata along with Shatrughna was also coming from that side by the same route which was used to go to and come from Kausalya's palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)