vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना
»
श्लोक 60
श्लोक
2.75.60
तदा तं शपथै: कष्टै: शपमानमचेतनम्।
भरतं शोकसंतप्तं कौसल्या वाक्यमब्रवीत्॥ ६०॥
अनुवाद
तब कौसल्या ने कठिन शपथों द्वारा अपना स्पष्टीकरण देते हुए शोकग्रस्त और अचेत हुए भरत से यह कहा-॥60॥
Then, giving her explanation by difficult oaths, Kausalya said this to the grief-stricken and unconscious Bharata -॥ 60॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×