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सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना
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श्लोक 43
श्लोक
2.75.43
संचितान्यस्य वित्तानि विविधानि सहस्रश:।
दस्युभिर्विप्रलुप्यन्तां यस्यार्योऽनुमते गत:॥ ४३॥
अनुवाद
'जिस व्यक्ति की सलाह पर आर्य श्री राम वन में गए थे, उसके द्वारा संचित नाना प्रकार के धन और सुख-सामग्री को डाकू लूट लें ॥ 43॥
'The various kinds of wealth and luxuries accumulated by the person on whose advice Arya Sri Ram went to the forest, may be looted by robbers. ॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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