श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.75.39 
संग्रामे समुपोढे च शत्रुपक्षभयंकरे।
पलायमानो वध्येत यस्यार्योऽनुमते गत:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
'जिसके कहने पर राम वन जाने को विवश हुए, शत्रुओं को भयभीत करने वाला युद्ध होने पर उसे भागते हुए मार डालना चाहिए ॥39॥
 
'The one on whose advice Rama was forced to go to the forest, when a war which frightens the enemy arises, he should be killed while running away. ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)