श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.75.34 
पुत्रैर्दासैश्च भृत्यैश्च स्वगृहे परिवारित:।
स एको मृष्टमश्नातु यस्यार्योऽनुमते गत:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'जिस व्यक्ति के कहने पर आर्य श्री राम वन में गए, वह अपने घर में अपने पुत्रों, दासों और सेवकों से घिरे होने पर भी अकेले मिठाई खाने के पाप का भागी है।
 
'The person on whose advice Arya Shri Ram went to the forest is guilty of the sin of eating sweets alone even when he is surrounded by his sons, slaves and servants in his own house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)