श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.75.22 
प्रैष्यं पापीयसां यातु सूर्यं च प्रति मेहतु।
हन्तु पादेन गा: सुप्ता यस्यार्योऽनुमते गत:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जिसके कहने पर बड़े भाई श्री राम को वन जाना पड़े, वह अत्यन्त पापी और नीच जाति का सेवक हो। वह सूर्य की ओर मुख करके मल-मूत्र त्याग करे और सोती हुई गायों को लात मारे (अर्थात् वह इन पाप कर्मों के बुरे फल का भागी हो)॥ 22॥
 
'The one on whose advice elder brother Shri Ram had to go to the forest, should be a servant of the most sinful and low castes. He should excrete urine and stool facing the sun and kick the sleeping cows (i.e. he should be a part of the bad consequences of these sinful acts).॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)