श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.75.18 
पपात चरणौ तस्यास्तदा सम्भ्रान्तचेतन:।
विलप्य बहुधासंज्ञो लब्धसंज्ञस्तदाभवत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वह कौसल्या के चरणों पर गिर पड़ा। उस समय वह अत्यन्त घबरा गया। बार-बार रोने लगा और मूर्च्छित हो गया। थोड़ी देर बाद उसे होश आया॥18॥
 
He fell at the feet of Kausalya. At that time he was in great panic. He wept repeatedly and lost consciousness. After a while he regained consciousness.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)