vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना
»
श्लोक 14
श्लोक
2.75.14
अथवा स्वयमेवाहं सुमित्रानुचरा सुखम्।
अग्निहोत्रं पुरस्कृत्य प्रस्थास्ये यत्र राघव:॥ १४॥
अनुवाद
'अथवा सुमित्रा को साथ लेकर अग्निहोत्र का संचालन करते हुए मैं स्वयं प्रसन्नतापूर्वक उस स्थान पर जाऊँगा जहाँ श्री रामजी निवास करते हैं॥14॥
'Or, taking Sumitra along with me and leading the Agnihotra, I myself will happily proceed to the place where Sri Rama resides.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×