श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 75: कौसल्या के सामने भरत का शपथ खाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.75.11 
इदं ते राज्यकामस्य राज्यं प्राप्तमकण्टकम्।
सम्प्राप्तं बत कैकेय्या शीघ्रं क्रूरेण कर्मणा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'बेटा! तुम तो राज्य चाहते थे न? सो तुम्हें यह राज्य बिना किसी बाधा के मिल गया; किन्तु दुःख की बात है कि कैकेयी ने जल्दबाजी में अत्यन्त क्रूर कर्म करके इसे प्राप्त कर लिया।
 
‘Son! You wanted the kingdom, right? So you got this kingdom without any obstacles; but it is a pity that Kaikeyi, in her haste, got it by doing very cruel deeds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)