श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.74.35 
इति नाग इवारण्ये तोमराङ्कुशतोदित:।
पपात भुवि संक्रुद्धो नि:श्वसन्निव पन्नग:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भरत वन में तोमर और अंकुश से पीड़ित हाथी की भाँति मूर्छित होकर भूमि पर गिर पड़े। वे क्रोध में भरकर सर्प की भाँति फुफकारने और लम्बी-लम्बी साँसें लेने लगे।
 
Saying this, Bharata fell down on the ground unconscious like an elephant afflicted by Tomar and Ankush in the forest. Filled with rage, he began to hiss like a snake and draw long breaths.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)