vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
»
सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना
»
श्लोक 34
श्लोक
2.74.34
अहमप्यवनीं प्राप्ते रामे सत्यपराक्रमे।
कृतकृत्यो भविष्यामि विप्रवासितकल्मष:॥ ३४॥
अनुवाद
‘जब सत्यपराक्रमी श्री रामचन्द्रजी अयोध्या भूमि में प्रवेश करेंगे, तभी मेरा कलंक दूर होगा और तभी मैं कृतार्थ होऊँगा’॥34॥
'When Satyaprakrami Shri Ramchandraji will enter the land of Ayodhya, only then will my stigma be removed and only then will I be grateful'. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×