श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.74.34 
अहमप्यवनीं प्राप्ते रामे सत्यपराक्रमे।
कृतकृत्यो भविष्यामि विप्रवासितकल्मष:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
‘जब सत्यपराक्रमी श्री रामचन्द्रजी अयोध्या भूमि में प्रवेश करेंगे, तभी मेरा कलंक दूर होगा और तभी मैं कृतार्थ होऊँगा’॥34॥
 
'When Satyaprakrami Shri Ramchandraji will enter the land of Ayodhya, only then will my stigma be removed and only then will I be grateful'. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)