श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.74.31 
आनाय्य च महाबाहुं कोसलेन्द्रं महाबलम्।
स्वयमेव प्रवेक्ष्यामि वनं मुनिनिषेवितम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
‘महान् पराक्रमी कोसलराज श्रीराम को यहाँ वापस लाकर मैं स्वयं ऋषियों से सेवित वन में प्रवेश करूँगा।
 
‘After bringing back the mighty, powerful King of Kosal, Sri Ram, here, I will myself enter the forest served by sages.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)