श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.74.15 
अन्यदा किल धर्मज्ञा सुरभि: सुरसम्मता।
वहमानौ ददर्शोर्व्यां पुत्रौ विगतचेतसौ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'एक समय देवपूज्य और धर्म को जानने वाली देवी सुरभि (कामधेनु) ने पृथ्वी पर अपने दो पुत्रों को देखा, जो खेत जोतते समय मूर्छित होकर गिर पड़े थे॥15॥
 
'Once upon a time Surabhi (Kamadhenu), the god-respected goddess and knowing the Dharma, saw her two sons on the earth, who had fallen unconscious while ploughing the field.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)