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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 2: अयोध्या काण्ड
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सर्ग 74: भरत का कैकेयी को कड़ी फटकार देना
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श्लोक 1
श्लोक
2.74.1
तां तथा गर्हयित्वा तु मातरं भरतस्तदा।
रोषेण महताविष्ट: पुनरेवाब्रवीद् वच:॥ १॥
अनुवाद
इस प्रकार अपनी माता की निन्दा करके भरत अत्यन्त क्रोध से भर गए और फिर कठोर वचन बोले-॥1॥
Having thus criticised his mother, Bharata was filled with great anger and then he spoke in harsh words -॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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