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ramayan 2.73.7: ‘बताओ, तुमने मेरे धर्मात्मा पिता राजा दशरथ का नाश क्यों किया? मेरे बड़े भाई श्री राम को घर से क्यों निकाल दिया और वे भी (तुम्हारी आज्ञा से) वन क्यों चले गए?॥7॥   |   ramayan सर्ग 2.73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.73.7 
विनाशितो महाराज: पिता मे धर्मवत्सल:।
कस्मात् प्रव्राजितो राम: कस्मादेव वनं गत:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘बताओ, तुमने मेरे धर्मात्मा पिता राजा दशरथ का नाश क्यों किया? मेरे बड़े भाई श्री राम को घर से क्यों निकाल दिया और वे भी (तुम्हारी आज्ञा से) वन क्यों चले गए?॥7॥
 
‘Tell me, why did you destroy my righteous father King Dasharath? Why did you throw my elder brother Shri Ram out of the house and why did he also go to the forest (at your behest)?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)