Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.73.28: ऐसा कहकर महाबली भरत दु:खी होकर पुनः कैकेयी को कटु वचनों से पीड़ा देने लगे और उसे जोर-जोर से डाँटने लगे, मानो मंदर पर्वत की गुफा में बैठा हुआ सिंह दहाड़ रहा हो। | ramayan सर्ग 2.73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा कहकर महाबली भरत दु:खी होकर पुनः कैकेयी को कटु वचनों से पीड़ा देने लगे और उसे जोर-जोर से डाँटने लगे, मानो मंदर पर्वत की गुफा में बैठा हुआ सिंह दहाड़ रहा हो।
Having said this, great Bharata, overcome with grief, once again began to torment Kaikeyi with bitter words and rebuke her loudly, as if a lion sitting in the cave of Mandara mountain was roaring.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्येऽयोध्याकाण्डे त्रिसप्ततितम: सर्ग:॥ ७३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके अयोध्याकाण्डमें तिहत्तरवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ७३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥