श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 73: भरत का कैकेयी को धिक्कारना और उसके प्रति महान् रोष प्रकट करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.73.12 
अपापदर्शिनं शूरं कृतात्मानं यशस्विनम्।
प्रव्राज्य चीरवसनं किं नु पश्यसि कारणम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी किसी में कोई दोष नहीं देखते। वे वीर, शुद्धात्मा और यशस्वी हैं। उन्हें चीर पहनाकर वनवास भेजने में तुम्हें क्या लाभ दिखाई देता है?॥12॥
 
‘Shri Ram does not see any fault in anyone. He is a brave man, pure souled and famous. What benefit do you see in making him wear a rag and send him to exile?॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)