Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 2.72.9-10: शत्रुओं को पीड़ा देने वाले केकयनरेषण ने मुझे जो धन और रत्न दिए थे, उनके भार से मार्ग में सभी वाहन थक गए थे। अतः राज-संदेश लेकर आने वाले दूतों के शीघ्र आने के कारण मैं यहाँ पहले ही आ गया हूँ। अच्छा माता! अब मैं जो कुछ पूछूँ, वह बताइए।॥9-10॥ | ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना । ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यन्मे धनं च रत्नं च ददौ राजा परंतप:।
परिश्रान्तं पथ्यभवत् ततोऽहं पूर्वमागत:॥ ९॥
राजवाक्यहरैर्दूतैस्त्वर्यमाणोऽहमागत:।
यदहं प्रष्टुमिच्छामि तदम्बा वक्तुमर्हति॥ १०॥
अनुवाद
शत्रुओं को पीड़ा देने वाले केकयनरेषण ने मुझे जो धन और रत्न दिए थे, उनके भार से मार्ग में सभी वाहन थक गए थे। अतः राज-संदेश लेकर आने वाले दूतों के शीघ्र आने के कारण मैं यहाँ पहले ही आ गया हूँ। अच्छा माता! अब मैं जो कुछ पूछूँ, वह बताइए।॥9-10॥
'All the vehicles were tired on the way due to the weight of the wealth and precious stones that Kekayanareshana, the tormentor of enemies, had given me. Therefore, I have come here earlier due to the urgency of the messengers carrying the royal message. Well mother, now tell me whatever I ask.'॥ 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥