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ramayan 2.72.7: कैकेयी के इतने मधुर स्वर में पूछने पर दशरथ के पुत्र कमल-नेत्र भरत ने अपनी माता को सब कुछ बता दिया।   |   ramayan सर्ग 2.72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना   ।   ramayan काण्ड 2: अयोध्या काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 2: अयोध्या काण्ड  »  सर्ग 72: भरत का कैकेयी से पिता के परलोकवास का समाचार पा दुःखी हो विलाप करना,कैकेयी द्वारा उनका श्रीराम के वनगमन के वृत्तान्त से अवगत होना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  2.72.7 
एवं पृष्टस्तु कैकेय्या प्रियं पार्थिवनन्दन:।
आचष्ट भरत: सर्वं मात्रे राजीवलोचन:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
कैकेयी के इतने मधुर स्वर में पूछने पर दशरथ के पुत्र कमल-नेत्र भरत ने अपनी माता को सब कुछ बता दिया।
 
When Kaikeyi asked in such a sweet voice, Dasharathan's son, lotus-eyed Bharata told his mother everything.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)